माय नामे इज आलोक


 Some lines dedicated to my friend ‘Alok’, on the occasion of his birthday (24th Feb)I request all, to wish him, by putting your wishes in comments section. (click on add comment below )
 
 
 
करते हे मन की , कोई कितना ले रोक
सुनते नहीं किसी की , कोई कितना ले टोक
नवाबो से ठाट हे, रजवाडो के शौक
दिल के हे राजा हम, नाम हे आलोक
 
 
 
 
 
भाता हे हमको मीठा हर भोग
रास नहीं आता पर लहसुन का छोंक
खाने में करते हे नित नए प्रयोग
हनुमान के भक्त हम , नाम हे आलोक
 
करते हे मस्ती, हर दम जी खोल
नाचते हे जमके, डीजे हो या ढोल
देते हे हिट हरदम, कुछ ऐसे हे संजोग
राहुल रॉय का हे चेहरा और नाम हे आलोक



बचपन से सताता हे सर्दी का रोग
जवानी में लगा पर क्र** का जोग
हिंदी की कविता हे वो संस्कृत का श्लोक
बसती हे दिल में जिसके, नाम हे आलोक
 
हँसते हे हरदम, चाहे कोई हो आलम
बदले  हे नहीं हम, बदल देते हे मोसम
सीधी सी बाते भी हमारी बन जाती हे जोक
जिन्दादिली की मिसाल हम, नाम हे आलोक
 
सिखा नहीं हे, कभी हमने शरमाना
दोस्ती में रखते नहीं, पर कोई पैमाना
मिलते हे हमसे , याद रखते हे वो लोग
हे दुनिया में बस एक ही, नाम हे आलोक
 

I request all, to wish him, by putting your wishes in comments section. (click on add comment below )

5 thoughts on “माय नामे इज आलोक

  1. Baki sab to ekdum mast likha he…. bas eska matlab nahi samjha muze….

    जवानी में लगा पर क्र** का जोग

    Ye ** kin aksharo ko chhupaye hue he!!!!!

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  2. thanks you have explained every thing about me and i know the meaning of kra***
    thanks again maine nani ji ko bhi padai hain yeh kavita unko bhi bahu bahut achhi lagi

    i here by u declare that the infornation given by u in above poem i true as per my belief…………………………….

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