बचपन


खेल तो वही हैं पर हाथो में अब कंचे नही हैं
इम्तहान तो रोज देते हैं पर अब हाथो में पर्चे नही हैं
दुनिया तो पहले भी झूठी थी, पर अब हम भी उतने सच्चे नही है
ये सच हैं यारो अब हम बच्चे नही हैं !

खिलौने अब उतने अच्छे लगते नही हैं
दोस्त अब आसानी से बनते नही हैं
लोग तो पहले भी कमीने ही थे, पर अब हम भी उतने अच्छे नही हैं
ये सच हैं यारो अब हम बच्चे नही हैं !

डिग्री तो ले ली पर ज्ञान स्कूल के बस्ते में ही है
पैसा तो कमा लिया पर खुशी बचपन के रस्ते में ही है
दर्द तो पहले भी होता था, पर अब कुछ भी जल्दी से भूलते नही है
ये सच हैं यारो अब हम बच्चे नही हैं !

पेंट तो पहन ली पर अंदर से कच्छे में ही हैं
कद तो बढ़ गया पर दिल छुटपन के साँचे में ही हैं
मन हैं फिर से बचपन जीने का, पर वक़्त के पहरे इतने कच्चे नही हैं
ये सच हैं यारो अब हम बच्चे नही हैं !

— अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)

इंजीनियर दिवस


एक इंजीनियर देश के किसी काम का नहीं
ना वो डॉक्टर की तरह लोगों की जान बचाता हैं,
ना वो पोलिस सेना की तरह रक्षा करता हैं,
ना ही नेता की तरह समाज की सेवा करता हैं

एक बिल्डिंग नहीं बनेगी तो काम चल सकता हैं
एक मशीन नहीं बनेगी तो भी काम चल सकता हैं
एक सॉफ्टवेयर नहीं बनेगा तो भी काम चल सकता हैं

पर वो डॉक्टर जिस स्टेथोस्कोप से धड़कन सुनता हैं वो इंजीनियर बनाते हैं
वो सेना जिस हथियार से लड़ती हैं वो इंजीनियर बना सकते हैं
वो किसान जिस ट्रेक्टर से खेती करता हैं वो इंजीनियर ही बना सकते हैं
वो नेता जिस माइक पर भाषण देते हैं वो भी किसी इंजीनियर ने बनाया होगा

इंजीनियर आने वाले तूफ़ान को बता सकते हैं
इंजीनियर माँ के पेट में पल रहे बच्चे को दिखा सकते हैं
इंजीनिअर आपको चाँद तक भी पहुँचा सकते हैं
इंजीनियर ही राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं

डिग्री जरुरी नहीं, हर वो व्यक्ति जो अपने स्तर पर छोटा या बड़ा निर्माण करे, इंजीनियर बन सकता हैं |

इंजीनियर दिवस की शुभकामनाये  

युवा


युवा हो तो इंक़लाब का ख्याल आना चाहिए
रगों में बहते खून में उबाल होना चाहिए

बर्दाश्त ना करने की आदत होना चाहिये
अन्याय के खिलाफ बुलंद आवाज़ होना चाहिए

दिल्ली में दलदल हैं इस दलदल को साफ होना चाहिए
भोपाल में कुछ हो तो लखनऊ में भी हुंकार होना चाहिए

कदम छोटे भी हो पर सोच विशाल होना चाहिए
मंज़िल मिले न मिले पर कोशिश हर बार होना चाहिए

नौजवान तुम नाचीज़ हो, तुम पर नाज़ होना चाहिए
धड़कन हो देश की, तुम्हे ज़िम्मेदारी का अहसास होना चाहिए

कोई भूखा ना हो, कहीं ज़ुल्म ना हो
हर काम तुम्हारा वतन के नाम होना चाहिए

–अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)

बारिश


घटाओ के साज पर बादलो के गीत,
बूंदों में बरसता कुदरत का संगीत

पत्तो की कोमलता पर बूंदों की छुअन,
रूमानियत के रोमांच में भीगता हर मन

हवाओ के आगोश में मिटटी की खुशबु,
दिल को करती मदहोश, बना देती बेकाबू

बूंद-बूंद में धडकती बादलो की साँस,
हर बूंद से बंधी इन्सान की आस

आसमा से बरसता बरकत का नीर,
दिखते हे इसमें राम, मिलते हे पीर

बिजलियों में कड़कती बादलो की रंजिश,
सूरज को छिपाने की असफल कोशिश

आसमान पर लहराती काले बादलो की झालर,
बेरंग धरती को औडाती हरियाली चादर

सूखे वृक्षों को देती जीवन, पंछियों को दाना
नदी तालो में भर देती पानी का खजाना

–अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)

शराब इतनी जरूरी तो नही !


गम में गला गीला हो जरुरी तो नहीं
ख़ुशी में हाथ में प्याला हो जरुरी तो नहीं !

शराब आदत ख़राब हैं, ये जीवन ख़राब ही करेगी
पर ये आदत ही जीने की जरूरत हो जरुरी तो नहीं !

चार दोस्त मिल जाये तो चाय पर भी बात हो सकती हैं
यूँ नशे में बहककर लड़खड़ाना जरुरी तो नहीं !

अरे वो मर्द ही क्या जो होशोहवास में मन की बात न कह सके
दिल हल्का करने के लिए जहर की जरूरत हो जरुरी तो नहीं !

हँसी तो ओकेसनली बोलने वालो पर आती हैं
कोई ओकेज़न हर दूसरे दिन हो जरुरी तो नहीं !

सरकार का काम हैं कमाना, कमाती रहेगी
पर उनकी कमाई के लिए खुद को क़त्ल करना जरुरी तो नहीं !

जरा पूछो उस बेसहारा बच्चें से जिसका बाप कहता था
शराब पीने से लिवर ख़राब ही हो जरुरी तो नहीं !

जरा पूछो उस दुखियारी माँ से जिसके बेटा कहता था
दो पेग लगाकर गाड़ी ना चला सको जरूरी तो नही !

जरा पूछो उस गरीब मज़दूर के परिवार से जो कहता था
देसी दारू पीकर मौत ही हो जाये जरूरी तो नही !

अरे नशा करना ही हैं तो इश्क़-इबादत-मेहनत का करो
यू अनमोल जीवन को मौत को सौपना जरूरी तो नही !

–अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)

इस दुनियाँ का यही रोना हैं !


इस दुनियाँ का यही रोना हैं ,
कर ली तो धोना हैं ,
नहीं हुई तो होना हैं !

हर पल हर घडी कुछ ना कुछ होना हैं,
जो बीत गया वो खोना हैं,
जो आने वाला हैं वो भी खोना हैं !
अब देख लीजिये आपको क्या करना हैं
शिकवे शिकायतों में घुटना हैं
या हँसते मुस्कुराते जीना हैं !
क्योकि इस दुनिया का तो यही रोना हैं
कर ली तो धोना हैं ,
नहीं हुई तो होना हैं !

जो कुछ लिखा हैं ज़िन्दगी में
सब कुछ होना हैं !
बचपन को बोना हैं
बुढ़ापे को ढोना हैं !
जवानी की तो बात ही मत कीजिये
इसमें तो बहुत कुछ होना हैं
दिल को भी खोना हैं
इश्क़ को भी होना हैं !
अब देख लीजिये आपको क्या करना हैं
मोहब्बत में हर पल पिरोना हैं
या नफरतो में खुद को निचोना हैं !
क्योकि इस दुनिया का तो यही रोना हैं
कर ली तो धोना हैं ,
नहीं हुई तो होना हैं !

मंज़िल मुकाम सब कुछ मिलेगा
हर किसी का एक मुकम्मल वक़्त होना हैं !
सपनो का बिछोना हैं
उम्मीद के साथ सोना हैं
आने वाला नया सवेरा हैं
जिसे जी भर के जीना हैं !
अब देख लीजिये आपको क्या करना हैं
सुस्त निकम्मे बनकर रहना हैं
या मेहनत का मोती बोना हैं !
क्योकि इस दुनिया का तो यही रोना हैं
कर ली तो धोना हैं ,
नहीं हुई तो होना हैं !