इंजीनियर दिवस


एक इंजीनियर देश के किसी काम का नहीं
ना वो डॉक्टर की तरह लोगों की जान बचाता हैं,
ना वो पोलिस सेना की तरह रक्षा करता हैं,
ना ही नेता की तरह समाज की सेवा करता हैं

एक बिल्डिंग नहीं बनेगी तो काम चल सकता हैं
एक मशीन नहीं बनेगी तो भी काम चल सकता हैं
एक सॉफ्टवेयर नहीं बनेगा तो भी काम चल सकता हैं

पर वो डॉक्टर जिस स्टेथोस्कोप से धड़कन सुनता हैं वो इंजीनियर बनाते हैं
वो सेना जिस हथियार से लड़ती हैं वो इंजीनियर बना सकते हैं
वो किसान जिस ट्रेक्टर से खेती करता हैं वो इंजीनियर ही बना सकते हैं
वो नेता जिस माइक पर भाषण देते हैं वो भी किसी इंजीनियर ने बनाया होगा

इंजीनियर आने वाले तूफ़ान को बता सकते हैं
इंजीनियर माँ के पेट में पल रहे बच्चे को दिखा सकते हैं
इंजीनिअर आपको चाँद तक भी पहुँचा सकते हैं
इंजीनियर ही राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं

डिग्री जरुरी नहीं, हर वो व्यक्ति जो अपने स्तर पर छोटा या बड़ा निर्माण करे, इंजीनियर बन सकता हैं |

इंजीनियर दिवस की शुभकामनाये  

शिव – गृहस्थ, पति और प्रेमी


नोट – ये लेख समर्पित हैं उन सभी स्त्रियों को जो अपने जीवनसाथी में किसी फ़िल्मी हीरो जैसी खूबी तलाशती हैं | ये लेख उन सज्जनो को भी समर्पित हैं को स्त्री को अपना दास समझते है या स्वयं उनके दास बन जाते हैं |


प्रेमी हो तो श्री कृष्ण जैसा !
पति हो तो भोलेनाथ जैसा !

प्रेमी हो तो श्री कृष्ण जैसा जो प्रेमिका को सदैव के लिए ह्रदय में स्थान दे !
पति हो तो भोलेनाथ जैसा जो पत्नी को ह्रदय ही नहीं अपितु तन-मन और जीवन में इस तरह सम्मिलित कर ले कि स्वयं अर्द्ध नारीश्वर बन जाये !

इसका यह अर्थ कदापि नहीं हैं कि प्रेम किसी और से किया जाये और जीवन साथी किसी और को बनाया जाये | बहुधा प्रेम किया नहीं जाता परन्तु जीवनसाथी का निर्णय हमेशा बहुत सोच-समझकर किया जाता हैं | पुराणों कथाओ में शिव को ऐसे ईश्वर के रूप में दिखाया जाता हैं जो सन्यासी के समान जीवन व्यतीत करते हैं, समाधी में रहते हैं, समस्त ऊर्जा का स्त्रोत हैं और संसार को विनाश से बचाते हैं | परन्तु शिव एक आदर्श पति का उत्तम उदाहरण भी हैं | उन्होने पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया तो उसके बाद उनका ध्यान किसी और स्त्री पर नहीं गया | एक आदर्श गृहस्थ की तरह वो अपने कर्म जैसे ध्यान-समाधी में ही लीन रहते हैं और बचा हुआ पूरा समय अपने परिवार और घर (कैलाश पर्वत) की देखभाल करते हैं | शिव कभी अपना समय इधर-उधर भ्रमण करने या अन्य व्यर्थ प्रपंच-मौज-मस्ती करने में व्यतीत नहीं करते | यही गृहस्थ की सर्वकालिक आदर्श परिभाषा हैं कि वो अपना पूरा समय अपने कर्म और परिवार को ही दे |

शिव का रहन-सहन सामान्य हैं, वो सामान्य वस्त्र पहनते हैं, साधारण सा जीवन व्यतीत करते हैं परन्तु अपने बच्चो को ऐसे आदर्श देते हैं कि उनके पुत्र गणेश माता-पिता को सारे संसार से बड़ा समझते हैं | एक गृहस्थ को भी सादे जीवन को अंगीकार करना चाहिए और अपनी पूरी पूंजी अपने परिवार के उच्च पालन-पौषण पर लगानी चाहिए | यहाँ पूंजी केवल रुपये पैसो की ही नहीं वरन आदर्श-संस्कार की भी है | यह एक विचित्र संयोग हैं कि शिव संन्यासी के वेश में विशुद्ध गृहस्थ हैं और कृष्ण एक गृहस्थ के वेश में साधु | एक आदर्श गृहस्थ वही है जिसका रहन-सहन साधारण हो पर कर्म और विचार उच्च |

शिव गृहस्थ के रूप में खरा सोना हैं तो पति के रूप में बहुमूल्य हीरा | उन्होंने पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया तो उसे अपने साथ बराबरी से बैठाया, अर्द्ध रूप नारी का जरूर लिया पर अर्द्ध रूप अपना भी अक्षुण्ण बनाये रखा | अर्द्धांगिनी का अर्थ तो शिव ने ही समझाया | यही विडंबना हैं आज पुरुष समाज के साथ कि वो या तो स्त्री को अपने चरणों में स्थान देते है या स्वयं स्त्री के चरणों में बैठकर दास बन जाते हैं | स्त्री ना भोग की वस्तु हैं और ना ही मंदिर की मूर्ति , उसे मनुष्य समझने की जरुरत हैं और बराबरी का स्थान देने की जरुरत हैं – ना इससे ज्यादा ना इससे कम |

शिव का प्रेमी स्वरुप शायद की किसी अवसर पर प्रकट हुआ हो | शिव ने अपना प्रेम सदैव एक गृहस्थ के समान अपने घर की दीवारों के अंदर ही दिखाया | एक अवसर पर ऐसा अवश्य हैं जब शिव प्रेम की उस पराकाष्टा को पार कर गए जहा तक शायद ही कोई प्रेमी पहुँचा होगा | माता सती के लिए शिव का रूदन जितना डराता है उतना ही व्यथित भी कर देता हैं | अपनी भार्या की मृत काया को लेकर संसार में भटकने वाले शिव के दुःख की कोई थाह नहीं | शिव का रूदन दर्शाता हैं कि वो किस कदर अपनी पत्नी को प्रेम करते हैं | संसार का सर्वशक्तिमान ईश्वर भी प्रेम में इतना विवश हैं | प्रेम में दुनिया से पत्थर खाने वाले मजनू इस कथा के सामने बौना हैं , जहर खाने वाले रोमियो तुच्छ हैं |

और अंत में चलते-चलते :: स्त्री का प्रेम इस संसार की सबसे अमूल्य वस्तु हैं, इसलिए हैं स्त्री समाज अपना प्रेम कभी किसी इडियट पर वेस्ट मत करना | यह अकारण नहीं कि सनातन धर्म में हरितालिका का व्रत बनाया तो शिव को पति के प्रतीतात्मक रूप में रखा गया, कृष्ण या राम को भी नहीं | एक पुरुष को कभी उसके बाहरी आडम्बर – वेशभूषा से मत परखना | एक पुरुष की पहचान उसके कर्म और विचारो से होती हैं | अपना प्रेम उसी को समर्पित करना जो तुम्हे बराबरी का स्थान दे, जिसका प्रेम तुम्हारे लिए कभी कम ना हो, जिसका हर कर्म समाज या परिवार के कल्याण के लिए हो, जो कर्म के पश्चात अपना पूरा समय तुम्हे और परिवार को दे, जो न तुम्हे अपना दास समझे और ना ही तुम्हे अपने सर पर बैठाये बल्कि दोस्त मानकर अपने साथ बैठाये, तुम्हारे मन की बात सुने और तुम्हारे विरह में जिसका रूदन समस्त संसार को व्यथित कर दे – वही तुम्हारे प्रेम का अधिकारी हैं |

युवा


युवा हो तो इंक़लाब का ख्याल आना चाहिए
रगों में बहते खून में उबाल होना चाहिए

बर्दाश्त ना करने की आदत होना चाहिये
अन्याय के खिलाफ बुलंद आवाज़ होना चाहिए

दिल्ली में दलदल हैं इस दलदल को साफ होना चाहिए
भोपाल में कुछ हो तो लखनऊ में भी हुंकार होना चाहिए

कदम छोटे भी हो पर सोच विशाल होना चाहिए
मंज़िल मिले न मिले पर कोशिश हर बार होना चाहिए

नौजवान तुम नाचीज़ हो, तुम पर नाज़ होना चाहिए
धड़कन हो देश की, तुम्हे ज़िम्मेदारी का अहसास होना चाहिए

कोई भूखा ना हो, कहीं ज़ुल्म ना हो
हर काम तुम्हारा वतन के नाम होना चाहिए

–अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)

बारिश


घटाओ के साज पर बादलो के गीत,
बूंदों में बरसता कुदरत का संगीत

पत्तो की कोमलता पर बूंदों की छुअन,
रूमानियत के रोमांच में भीगता हर मन

हवाओ के आगोश में मिटटी की खुशबु,
दिल को करती मदहोश, बना देती बेकाबू

बूंद-बूंद में धडकती बादलो की साँस,
हर बूंद से बंधी इन्सान की आस

आसमा से बरसता बरकत का नीर,
दिखते हे इसमें राम, मिलते हे पीर

बिजलियों में कड़कती बादलो की रंजिश,
सूरज को छिपाने की असफल कोशिश

आसमान पर लहराती काले बादलो की झालर,
बेरंग धरती को औडाती हरियाली चादर

सूखे वृक्षों को देती जीवन, पंछियों को दाना
नदी तालो में भर देती पानी का खजाना

–अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)

केके


कृष्णकुमार कुन्नथ उर्फ़ केके को सबसे पहले हमने सुना एल्बम “पल” में | पल-चल जैसे नर्सरी राइम वाले शब्दों पर बना गीत “ये हैं प्यार के पल” आज भी स्कूल कॉलेज की यादो का एंथम बना हुआ हैं | ठहराव केके की गायकी का मूल तत्व हैं, इस गीत में भी वो पल या चल को बड़े इत्मीनान से बोलकर थोड़ा रुकते हैं और यही वो पल हैं जहा वो गीत का सारा भाव समझा देते हैं और आगे का गीत हम बस स्कूल कॉलेज की यादो के गलियारे में बैठकर मंत्रमुग्ध होकर सुनते ही रह जाते हैं | इसी तरह का एक गीत था – “यारो दोस्ती बड़ी ही हसीन हैं” | दोस्ती के भाव को दीपक की बाती जैसी लय में जितनी खूबसूरती और कोमलता से केके ने गाया हैं वो शायद की किसी और गीत में सुनने को मिले |


केके को किसी फिल्म के गीत में शायद पहली बार हमने सुना फिल्म हम दिल दे चुके सनम के गीत “तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही” में | अपने पहले ही प्रयास में केके ने वो मुकाम हासिल किया जिससे ऊपर जाना उनके लिए भी आज तक मुमकिन नहीं हुआ | इससे पहले और इसके बाद में भी जितने दर्द भरे गीत बने, सभी में गायक सुर-ताल और लय के साथ बड़े-बड़े आलाप लेते हुए गाता था, जबकि वास्तविकता में ये मुमकिन ही नहीं हैं | जब कोई दुःख में हो तो सुरो पर संतुलन कैसे बना सकता हैं | केके ने इस गीत को चीखते-चिल्लाते हुए लहजे में गला फाड़कर गाया | जैसे कोई अपनी किस्मत पर रो रहा हो, ईश्वर से शिकायत कर रहा हो – “जिस्म मुझे देकर मिट्टी का, शीशे सा दिल क्यों बनाया” | पहली बार ये गीत केवल बेसुरे के चीखने-चिल्लाने से ज्यादा कुछ नहीं लगेगा पर जब ये गीत इत्मीनान से पूरा सुनेगे तो देखेंगे गीत में केके ने वाकई में कमाल ही कर दिया था (खासकर “लूट गए” इस शब्द में तो केके ने ऐसा सुर दिया हैं कि कोई सड़क पर लौटते हुए कराह रहा हैं – “लूट गए” )| यकीन ही नहीं होता हैं “दोस्ती बड़ी ही हसीं हैं” जैसा कोमल गीत और “तड़प-तड़प” जैसा कठोर गीत एक ही गायक ने गाये हैं | आप इस गीत को अगर फिल्म में देखेंगे तो पाएंगे कि केके की आवाज़ में जितना दर्द था उतना सलमान खान भी अपने अभिनय से पैदा नहीं कर पाए हैं | अपने पहले ही प्रयास में केके समकालीन गायको से कही आगे निकल गए |


एक और गीत था – “मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना ख़ुशी” | नीरस और एकाकी जीवन से उपजे रंज की भावनाओ पर आधारित ये गीत केके ने बड़े इत्मीनान और ठहराव से गाया हैं | दर्द का ये स्वरुप केवल केके ही दिखा सकते थे कि जीवन में कोई बड़ा दुःख नहीं पर फिर भी कोई दुखी हैं और इस दुःख को बड़े फिलॉसॉफिकल तरीके से बता रहा हैं – “जश्न ये रास ना आया, मज़ा तो बस गम में आया हैं” | इस गीत को केके ने बहुत सहज अंदाज में गाया हैं, जैसे कोई हमारे सामने बैठा हैं और अपना हाल बता रहा हैं, और हम उसकी नीरस जीवन की बातो को बड़े चाव से सुन रहे हैं | केके की सहजता, आवाज़ का टेक्सचर, गीत के बोल और इरफ़ान का अभिनय इस गीत के मुख्य आकर्षण हैं | “आवारापन-बंजारापन” भी इसी अंदाज का गीत हैं, जो सुनने पर दिल में हुक सी उठाता हैं, इस गीत में आवारापन-बंजारापन शब्द ही केके ने इतने जादुई और रहस्मयी अंदाज में बोले हैं कि आगे का गीत ना भी सुने तो ये शब्द आपके ह्रदय में गूंजते रहेंगे | फिल्म “रहना हैं तेरे दिल में ” केके ने गाया हैं – “सच कह रहा हैं दीवाना” | प्रेम में नाकाम प्रेमी के भावो से भरा ये गीत जितना दर्द में डूबा हैं, उतना ही मधुर और कर्णप्रिय भी |


केके ने माधुर्य भरे गीत भी बहुत गाये हैं | “क्यों आजकल नींद कम, ख्वाब ज्यादा हैं” गीत में वो अपनी जादुई आवाज़ से प्रेम के उत्साह को दिखाते हैं तो “सज़दे किये हैं मैंने” गीत में प्रेम की खुशी और ईश्वर के प्रति गरेटिटूयड की भावना दिखाते हैं | ” दिल इबादत” और “ज़रा सा दिल में दे जगह तू” जैसे गीत प्रेम की मिठास को हमारे कानो में ही नहीं बल्कि ह्रदय-आत्मा में घोल देते हैं | ये भी केके की आवाज़ का जादू हैं कि खुदा, दिल जैसे दर्जनों बार उपयोग किये गए घिसे-पीटे शब्दों से भरा गीत “खुदा जाने” सुपरहिट हो जाता हैं | फिल्म “बचना ऐ हसीनो” के इस गीत में केके “खुदा जाने” में ऐसा स्वर लेते हैं कि आवाज़ आसमान के पार खुदा तक पहुचानी हो और उसके तुरंत ही बाद “कि बन गया हूँ मैं तेरा” इस अंदाज में गाते हैं कि आवाज़ सिर्फ दो प्रेमियों के बीच सिमटी रहे | शब्दों में भावनाओ का ऐसा उतार-चढ़ाव देकर सुनने वाले के ह्रदय में चाशनी घोलना ही केके के गायन का मुख्य जादू हैं, आज भी हम “पल”, “आवारापन-बंजारापन”, “खुदा-जाने” जैसे शब्दों को सुनते ही इन गीतों में जैसे खो जाते हैं |


दो गीत और हैं जिनके बिना हमारी चर्चा अधूरी रहेगी | बजरंगी भाईजान फिल्म में एक गीत हैं – “तू जो मिला तो सब कुछ है हासिल” और इक़बाल फिल्म का गीत “आशाएं” | मुन्नी और बजरंगी के रिश्ते पर आधारित गीत “आशियाना मेरा साथ तेरे हैं ना” जैसी भावपूर्ण पंक्ति से आरम्भ होता हैं और “जैसे तू धड़कन मैं दिल” के अंजाम तक पहुँचता हैं | ये गीत नहीं बल्कि पूरी फिल्म की कहानी हैं, मुन्नी और बजरंगी के मासूम रिश्ते को केके भी उतनी ही कोमलता और संवेदना से नाम देते हैं – “जैसे तू धड़कन मैं दिल” | इक़बाल फिल्म का गीत “आशाये” में केके उम्मीद और हौसलों का ज्वालामुखी पैदा कर देते हैं | जीवन में जब भी आप आप को निराश और हारा हुए पाए, ये गीत जरूर सुने, इस गीत में केके की आवाज़ नसों में उम्मीदों का हीमोग्लोबिन पैदा करने की काबिलियत रखती हैं |


सात सुर होते हैं संगीत में, पर केके आठवे सुर के भी महारथी हैं | किसी भी गीत की आत्मा पर, भाव पर केके की पकड़ वैसी ही हैं जैसी मधुमक्खी की पकड़ शहद पर | और ये शहद जब सुनने वाले के कानो में पड़ता हैं तो अजब सा मिठास भरा जादू घोल देता हैं | तरल आवाज़ के मालिक केके का कंठ किसी भी सांचे में ढल जाता हैं, दर्द में वो तड़प जाता है तो ख़ुशी में चहक जाता हैं | किसी दिन शायद केके कोई भजन गाये तो वो भी उपासना का महाकाव्य बन जायेगा | फिल्म ओम शांति ओम में केके का एक गीत हैं – “आँखों में तेरी अज़ब सी अदाए हैं” | आवाज़ में केके की भी अज़ब सा जादू हैं, दिल को बना दे जो पतंग वो केके के गीत हैं | और हम इन गीतों के संसार में ही आँखे मूंदकर बस खोये रहना चाहते हैं |

— अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)

शराब इतनी जरूरी तो नही !


गम में गला गीला हो जरुरी तो नहीं
ख़ुशी में हाथ में प्याला हो जरुरी तो नहीं !

शराब आदत ख़राब हैं, ये जीवन ख़राब ही करेगी
पर ये आदत ही जीने की जरूरत हो जरुरी तो नहीं !

चार दोस्त मिल जाये तो चाय पर भी बात हो सकती हैं
यूँ नशे में बहककर लड़खड़ाना जरुरी तो नहीं !

अरे वो मर्द ही क्या जो होशोहवास में मन की बात न कह सके
दिल हल्का करने के लिए जहर की जरूरत हो जरुरी तो नहीं !

हँसी तो ओकेसनली बोलने वालो पर आती हैं
कोई ओकेज़न हर दूसरे दिन हो जरुरी तो नहीं !

सरकार का काम हैं कमाना, कमाती रहेगी
पर उनकी कमाई के लिए खुद को क़त्ल करना जरुरी तो नहीं !

जरा पूछो उस बेसहारा बच्चें से जिसका बाप कहता था
शराब पीने से लिवर ख़राब ही हो जरुरी तो नहीं !

जरा पूछो उस दुखियारी माँ से जिसके बेटा कहता था
दो पेग लगाकर गाड़ी ना चला सको जरूरी तो नही !

जरा पूछो उस गरीब मज़दूर के परिवार से जो कहता था
देसी दारू पीकर मौत ही हो जाये जरूरी तो नही !

अरे नशा करना ही हैं तो इश्क़-इबादत-मेहनत का करो
यू अनमोल जीवन को मौत को सौपना जरूरी तो नही !

–अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)

इस दुनियाँ का यही रोना हैं !


इस दुनियाँ का यही रोना हैं ,
कर ली तो धोना हैं ,
नहीं हुई तो होना हैं !

हर पल हर घडी कुछ ना कुछ होना हैं,
जो बीत गया वो खोना हैं,
जो आने वाला हैं वो भी खोना हैं !
अब देख लीजिये आपको क्या करना हैं
शिकवे शिकायतों में घुटना हैं
या हँसते मुस्कुराते जीना हैं !
क्योकि इस दुनिया का तो यही रोना हैं
कर ली तो धोना हैं ,
नहीं हुई तो होना हैं !

जो कुछ लिखा हैं ज़िन्दगी में
सब कुछ होना हैं !
बचपन को बोना हैं
बुढ़ापे को ढोना हैं !
जवानी की तो बात ही मत कीजिये
इसमें तो बहुत कुछ होना हैं
दिल को भी खोना हैं
इश्क़ को भी होना हैं !
अब देख लीजिये आपको क्या करना हैं
मोहब्बत में हर पल पिरोना हैं
या नफरतो में खुद को निचोना हैं !
क्योकि इस दुनिया का तो यही रोना हैं
कर ली तो धोना हैं ,
नहीं हुई तो होना हैं !

मंज़िल मुकाम सब कुछ मिलेगा
हर किसी का एक मुकम्मल वक़्त होना हैं !
सपनो का बिछोना हैं
उम्मीद के साथ सोना हैं
आने वाला नया सवेरा हैं
जिसे जी भर के जीना हैं !
अब देख लीजिये आपको क्या करना हैं
सुस्त निकम्मे बनकर रहना हैं
या मेहनत का मोती बोना हैं !
क्योकि इस दुनिया का तो यही रोना हैं
कर ली तो धोना हैं ,
नहीं हुई तो होना हैं !