विजयादशमी


जल जाता हैं रावण रह जाती हैं राख
सबको समझाती एक ही बात
कि रावण को मारता नही हैं राम
रावण को मारता हैं उसका अभिमान

पुरुष की भी होती हैं लक्ष्मण रेखा
पुरुष के लिए भी होती हैं मान मर्यादा
जिसने भी इस रेखा को लांघा
उसका विनाश सारे संसार ने देखा

गृहस्थ सी गरिमा और साधु सा सदाचार
यही होते हैं पुरुष के श्रृंगार
और सत्य की रक्षा, अन्याय का दमन
यही हैं वास्तविक पुरुषार्थ की पहचान

राम रावण हैं दो विचार
एक दूषित तो दूसरा निर्विकार
जीवन में उतारो राम सा व्यवहार
इसीलिए तो हैं विजयादशमी का त्यौहार

—- अंकित सोलंकी, उज्जैन (मप्र)
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देते हैं गणेश कितना सुंदर संदेश


देते हैं गणेश कितना सुंदर संदेश
कि कभी ना छिपाओ अपने पेट का फेट
कभी ना छिपाओ अपने चेहरे का ऐब
सुखी वही जिसके मन मे नही कोई द्वेष
चरित्र का धनी हो बुद्धि में श्रेष्ठ
कहलायेगा वही सर्वश्रेष्ठ

देते हैं गणेश कितना सुंदर संदेश
जय-जय गणेश, जय-जय गणेश

देते हैं गणेश कितना सुंदर संदेश
कि माता-पिता से बढ़कर होता नही विदेश
वाहन-साधन से भी नही होता कुछ विशेष
गलाकाट स्पर्धा में भागना ही नही विकल्प एक
धीरज और बुद्धि से खुलता हर समस्या का भेद
ब्रम्हांड पाताल भी सब हो जाते हैं एक

देते हैं गणेश कितना सुंदर संदेश
जय-जय गणेश, जय-जय गणेश

देते हैं गणेश बडा सुंदर संदेश
कि मिट्टी की काया का होगा एक दिन मिट्टी में समावेश
इसलिए हर क्षण जीवन को करो उत्सव की तरह सेलिब्रेट
ज्ञान ध्यान में बिताओ दिन रैन
बढ़ाओ प्रेम और मिटाओ क्लेश
तभी प्रसन्न रहेंगे सदा गणेश

देते हैं गणेश कितना सुंदर संदेश
जय-जय गणेश, जय-जय गणेश

–अंकित सोलंकी (उज्जैन,मप्र)