अय्याशियाँ


अय्याशियों की आदत निराली होती हैं
मस्ती की ये बोतले ना कभी खाली होती हैं !
खाली होती हैं गलियाँ सूरज की रोशनी देखकर
दिन के उजालो में रंगीनियों को भी परेशानी होती हैं !
वो बंद हो जाते हैं मयखाने दिल को लुभाने वाले
शहर में जब भी जमकर पहरेदारी होती हैं !
चोर फिर भी बाज़ नहीं आते चोरी करने की आदत से
पर मासूमो को रुसवा करना सिपाही की ज़िम्मेदारी होती हैं !
हैं कुछ लोग इस शहर में जो खुद को समझदार कहते हैं
पर उनकी समझदारी बस स्कूलों में पढ़ाने की होती हैं !
वो चौराहे पर फूँकते रहते हैं हर लम्हे को धुएँ में
जिन नौजवानों की उमर कुछ कर दिखाने की होती हैं!
और दिखाई देती हैं वो तस्वीर भी यहाँ के बागीचो में
जो बाते बंद कमरों में बताने की होती हैं !
क्या कहूँ और अब अपने शहर की आदतों के बारे में
ये आदत हैं मेरी ज्यादा बोलने की, इससे ही मेरी बदनामी होती हैं !

शहर


इस शहर की गलियों में गफलत हैं बहुत,
आवाज़े हे कम पर शोर हे बहुत

हवाए भी रखती हे यहाँ आग का असर
खुशबूये हैं कम जिनमे पर धुआं हे बहुत

तनहा मायूस लगती हर सूरत संजीदा यहाँ
ख्वाहिशे घुटी हैं जिसमे, हसरते सहमी हैं बहुत

डर गुस्से का हर किस्सा होता निगाहों से बयाँ यहाँ
कुछ आँखे रोई हैं बहुत, कुछ गुर्रायी हैं बहुत

मतलबपरस्त हो चूका इमां हर इन्सां का
खुदाई दिखती कम पर खुदगर्जी बिकती हे बहुत

कितनी बेरहम हे दुआये खुदा के दलालों की भी
हमदर्दी हैं गुम जिसमे पर नफरते महकती हैं बहुत

कुछ कारण हैं कि लिख रहे हे ऐसी गजल गाली खाने को
वरना महफ़िल में तारीफे हमने भी बटोरी हैं बहुत

ये किस शहर में आ गए ‘ठाकुर’ तुम अपनी तकदीर तराशने को
पत्थरो कि हैं हुकूमत हर जगह यहाँ और फूलो कि ज़िल्लत हैं बहुत